Monday, 28 September 2015

ज़िंदा

कुछ लोग ज़िंदा हो कर भी मर गए
ना कानोकान खबर हुई किसी को
ना जलाना या दफ़नाना पड़ा। 
बस मर गए
साँस तो चल चल रही है
दिल भी धड़क रहा है
पर अंदर से सिसकियाँ भी नहीं चलती। 
बस मर गए
ना जिस्म ठंडा पड़ा 
ना आह की आवाज़ आई 
ना कोई लपटे उठी ना कब्र खुदी। 
बस मर गए
ज़िंदा होकर भी। 

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