Friday, 25 September 2015

जब खो गया एक पन्ना

जब कविताओ का एक पन्ना खो गया
तो याद आया की कितना मुश्किल है
अपनी ही प्रतिमाओ को याद रखना
वे तो बस निकल आती है। 
उतारा पन्ने पर तो सही,
नही तो फिर कभी और आने का इतजार 
वो आएंगी तो भी जरुरी नही वैसी ही हो
जो छूट गया थी कागज पर
जाने वो अब तक घूम कर आएगी
कुछ साथ लाएगी तो कुछ
बदली सी छोड़ भी आएगी कही कुछ।   

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